中新网3月26日色情性&肛交集合电 据湖北省政府网站消息色情性&肛交集合,湖北省新型冠状病色情性&肛交集合毒感染肺炎疫情防控色情性&肛交集合指挥部今日发布通色情性&肛交集合告称,对确实无法申领健康码的人员,色情性&肛交集合包括在鄂外籍人士色情性&肛交集合、港澳台同胞等,色情性&肛交集合入境14天内统色情性&肛交集合一接受当地集中隔离医学观察,解除医学观察后色情性&肛交集合,凭当地卫生健康行政部色情性&肛交集合门出具的健康监色情性&肛交集合测证明安全有序流动。
通告称,色情性&肛交集合为进一步做好疫情防控期间色情性&肛交集合在鄂外籍人士、色情性&肛交集合港澳台同胞服务保障工作,遵照湖北省关于解除离鄂通道管控和武汉市复工复产色情性&肛交集合安排等事项通告及《关于做好湖北健康色情性&肛交集合码核码、转码和跨省互认工作的通知》(鄂防指发色情性&肛交集合〔2020〕163号)精神,现就在鄂外籍人士、色情性&肛交集合港澳台同胞凭健康监测证明安全色情性&肛交集合有序流动事通告如下:
坚持同等待遇,在鄂外籍人士、港澳台同胞都适用于省指挥部3月24日“解除离鄂通道管控和武汉市复工复产安排等事项”通告。
二、对确实无法申领健康码的人员,包括在鄂外籍人士、港澳台同胞等,入境14天内统一接受当地集中隔离医学观察,解除医学观察后,凭当地卫生健康行政部门出具的健康监测证明安全有序流动;入境14天后,可凭现居住地社区中新网3月26日色情性&肛交集合电 据湖北省政府网站消息色情性&肛交集合,湖北省新型冠状病色情性&肛交集合毒感染肺炎疫情防控色情性&肛交集合指挥部今日发布通色情性&肛交集合告称,对确实无法申领健康码的人员,色情性&肛交集合包括在鄂外籍人士色情性&肛交集合、港澳台同胞等,色情性&肛交集合入境14天内统色情性&肛交集合一接受当地集中隔离医学观察,解除医学观察后色情性&肛交集合,凭当地卫生健康行政部色情性&肛交集合门出具的健康监色情性&肛交集合测证明安全有序流动。
通告称,色情性&肛交集合为进一步做好疫情防控期间色情性&肛交集合在鄂外籍人士、色情性&肛交集合港澳台同胞服务保障工作,遵照湖北省关于解除离鄂通道管控和武汉市复工复产色情性&肛交集合安排等事项通告及《关于做好湖北健康色情性&肛交集合码核码、转码和跨省互认工作的通知》(鄂防指发色情性&肛交集合〔2020〕163号)精神,现就在鄂外籍人士、色情性&肛交集合港澳台同胞凭健康监测证明安全色情性&肛交集合有序流动事通告如下:(村)出具的健康监测证明安全有序流动。
出具健康监测证明的基本要素包括入境人员身份基本信息和监测当日体温(腋下温度)≤37.3℃情况,且无发热、干咳、乏力等临床表现,无确诊中新网3月26日色情性&肛交集合电 据湖北省政府网站消息色情性&肛交集合,湖北省新型冠状病色情性&肛交集合毒感染肺炎疫情防控色情性&肛交集合指挥部今日发布通色情性&肛交集合告称,对确实无法申领健康码的人员,色情性&肛交集合包括在鄂外籍人士色情性&肛交集合、港澳台同胞等,色情性&肛交集合入境14天内统色情性&肛交集合一接受当地集中隔离医学观察,解除医学观察后色情性&肛交集合,凭当地卫生健康行政部色情性&肛交集合门出具的健康监色情性&肛交集合测证明安全有序流动。
通告称,色情性&肛交集合为进一步做好疫情防控期间色情性&肛交集合在鄂外籍人士、色情性&肛交集合港澳台同胞服务保障工作,遵照湖北省关于解除离鄂通道管控和武汉市复工复产色情性&肛交集合安排等事项通告及《关于做好湖北健康色情性&肛交集合码核码、转码和跨省互认工作的通知》(鄂防指发色情性&肛交集合〔2020〕163号)精神,现就在鄂外籍人士、色情性&肛交集合港澳台同胞凭健康监测证明安全色情性&肛交集合有序流动事通告如下:病例(含无症状感染者)、疑似病例、不能排除感染可能的发热患者接触史。出省人员应提前了解并遵守目的地疫情防控相关规定。
三、无健康码的在鄂外籍人士、港澳台同胞可凭上述健康监测证明乘坐公共交通工具安全出行。 色情性&肛交集合
Thursday, March 26, 2020
Monday, March 9, 2020
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में ही दंगा क्यों?
“मम्मा, मेरा शार्पनर खो गया है और स्टेंसिल भी टूट गई है. कल स्कूल के लिए प्रोजेक्ट बनाना है. मैं समीर (बदला हुआ नाम) के घर से लेकर अभी आ रही हूं.”
ये कहते हुए 12 साल की आन्या (बदला हुआ नाम) बिना मां का जवाब सुने, तुरंत बगल में रहने वाले समीर भाईजान के घर की ओर दौड़ पड़ी. समीर के घर का दरवाज़ा हमेशा की ही तरह खुला था, बाहर कोई घंटी भी नहीं थी.
आन्या और समीर का ये रिश्ता पिछले 12 साल से ऐसे ही चला आ रहा था, ना घरों के बीच कोई दीवार थी और ना ही दिलों में कोई दरार थी, लेकिन फ़रवरी के आख़िरी हफ़्ते में हुए दंगों के बाद ये तस्वीर बदल गई, रिश्ते बदल गए. दिल्ली में हुए दंगों ने दिलों में भी दूरियाँ पैदा कर दीं. उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दंगों के बाद आन्या और समीर के रिश्ते अब पहले जैसे नहीं रह गए हैं. जिन घरों के दरवाज़े पहले एक-दूसरे के लिए हमेशा खुले रहते थे, अब वहाँ ख़ामोशी है और आन्या चाहकर भी अपने समीर भाईजान के घर नहीं जा सकती, क्योंकि पड़ोस का वो मकान अब ख़ाली है, उस पर ताला लगा हुआ है. बाहर पड़ी समीर की साइकिल, जलकर राख हो चुकी है. इस साइकिल से आन्या की भी बहुत सी यादें जुड़ी हैं, ये यादें अब उसके दिल में दफ़न होकर रह जाएंगी.
तीन दशकों में दिल्ली ने ऐसी हिंसा नहीं देखी जो पिछले हफ़्ते उत्तर पूर्वी दिल्ली में देखी गई. हिंसा में अब तक 47 लोगों की मौत की बात सामने आई है. क्या बड़े, क्या बुज़ुर्ग, क्या हिंदू, क्या मुसलमान? दंगो ने ना जाति देखी ना धर्म, ना पुलिस वालों को छोड़ा न ख़ुफ़िया विभाग वालों को. जो सामने आया वही दंगों की आग में झुलस गया. दंगाइयों ने ना तो गर्भवती महिलाओं को बख़्शा, ना दुधमुँहे बच्चों को, जो भी दिखा, वो दंगाइयों की नफ़रत का शिकार हो गया.
कई लोग इसे सीएए के विरोध प्रदर्शन से जोड़ कर देख रहे हैं तो कई जाफ़राबाद में सीएए के ख़िलाफ़ प्रदर्शन पर बैठी महिलाओं को दंगों के लिए ज़िम्मेदार बता रहे हैं. कई कपिल मिश्रा के पुलिस के सामने दिए गए बयानों को दंगा भड़काने के लिए ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं. आम आदमी पार्टी ने इसे बीजेपी से जोड़ दिया और बीजेपी ने आम आदमी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन पर आरोप लगाया. कई लोगों ने कांग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहां पर भी आरोप लगाए.
इन आरोप-प्रत्यारोप के बीच जो बात सबसे अहम है वो ये कि आख़िर उत्तर पूर्वी दिल्ली में ये हिंसा देखते ही देखते कैसे फैल गई? क्या इलाक़े की डेमोग्राफ़ी के कारण ऐसा हुआ? क्या ये महज संयोग है या फिर ये एक तरह का नया प्रयोग है?
ये समझने के लिए हमें उत्तर पूर्वी दिल्ली के धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक और भौगोलिक ताने-बाने को बारीक़ी से समझने की ज़रूरत है.
जरूरत है समीर और आन्या के परिवारों की तरह वहां रहने वाले लाखों परिवारों को समझने की. उनके रहने के तौर तरीक़े, पढ़ाई-लिखाई, काम-काज को समझने की. ताकि हम ये समझ सकें कि दंगों से इन सब बातों से जोड़ना कितना सही है?
2011 की जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक़ उत्तर-पूर्वी दिल्ली में तकरीबन 22 लाख लोग रहते हैं. ज़ाहिर है ये 10 साल पुराना आंकड़ा है. उस लिहाज़ से इस इलाक़े की आबादी अब और भी ज़्यादा हो गई होगी. क्षेत्रफल के हिसाब से दिल्ली का ये हिस्सा 62 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है. यहां आबादी के घनत्व की बात करें तो 36155 लोग प्रति वर्ग किलोमीटर में रहते हैं. दिल्ली के औसत जनसंख्या घनत्व के मुक़ाबले ये अनुपात तीन गुना ज़्यादा है और मुंबई के मुक़ाबले ये दोगुना है.
ये कहते हुए 12 साल की आन्या (बदला हुआ नाम) बिना मां का जवाब सुने, तुरंत बगल में रहने वाले समीर भाईजान के घर की ओर दौड़ पड़ी. समीर के घर का दरवाज़ा हमेशा की ही तरह खुला था, बाहर कोई घंटी भी नहीं थी.
आन्या और समीर का ये रिश्ता पिछले 12 साल से ऐसे ही चला आ रहा था, ना घरों के बीच कोई दीवार थी और ना ही दिलों में कोई दरार थी, लेकिन फ़रवरी के आख़िरी हफ़्ते में हुए दंगों के बाद ये तस्वीर बदल गई, रिश्ते बदल गए. दिल्ली में हुए दंगों ने दिलों में भी दूरियाँ पैदा कर दीं. उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दंगों के बाद आन्या और समीर के रिश्ते अब पहले जैसे नहीं रह गए हैं. जिन घरों के दरवाज़े पहले एक-दूसरे के लिए हमेशा खुले रहते थे, अब वहाँ ख़ामोशी है और आन्या चाहकर भी अपने समीर भाईजान के घर नहीं जा सकती, क्योंकि पड़ोस का वो मकान अब ख़ाली है, उस पर ताला लगा हुआ है. बाहर पड़ी समीर की साइकिल, जलकर राख हो चुकी है. इस साइकिल से आन्या की भी बहुत सी यादें जुड़ी हैं, ये यादें अब उसके दिल में दफ़न होकर रह जाएंगी.
तीन दशकों में दिल्ली ने ऐसी हिंसा नहीं देखी जो पिछले हफ़्ते उत्तर पूर्वी दिल्ली में देखी गई. हिंसा में अब तक 47 लोगों की मौत की बात सामने आई है. क्या बड़े, क्या बुज़ुर्ग, क्या हिंदू, क्या मुसलमान? दंगो ने ना जाति देखी ना धर्म, ना पुलिस वालों को छोड़ा न ख़ुफ़िया विभाग वालों को. जो सामने आया वही दंगों की आग में झुलस गया. दंगाइयों ने ना तो गर्भवती महिलाओं को बख़्शा, ना दुधमुँहे बच्चों को, जो भी दिखा, वो दंगाइयों की नफ़रत का शिकार हो गया.
कई लोग इसे सीएए के विरोध प्रदर्शन से जोड़ कर देख रहे हैं तो कई जाफ़राबाद में सीएए के ख़िलाफ़ प्रदर्शन पर बैठी महिलाओं को दंगों के लिए ज़िम्मेदार बता रहे हैं. कई कपिल मिश्रा के पुलिस के सामने दिए गए बयानों को दंगा भड़काने के लिए ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं. आम आदमी पार्टी ने इसे बीजेपी से जोड़ दिया और बीजेपी ने आम आदमी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन पर आरोप लगाया. कई लोगों ने कांग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहां पर भी आरोप लगाए.
इन आरोप-प्रत्यारोप के बीच जो बात सबसे अहम है वो ये कि आख़िर उत्तर पूर्वी दिल्ली में ये हिंसा देखते ही देखते कैसे फैल गई? क्या इलाक़े की डेमोग्राफ़ी के कारण ऐसा हुआ? क्या ये महज संयोग है या फिर ये एक तरह का नया प्रयोग है?
ये समझने के लिए हमें उत्तर पूर्वी दिल्ली के धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक और भौगोलिक ताने-बाने को बारीक़ी से समझने की ज़रूरत है.
जरूरत है समीर और आन्या के परिवारों की तरह वहां रहने वाले लाखों परिवारों को समझने की. उनके रहने के तौर तरीक़े, पढ़ाई-लिखाई, काम-काज को समझने की. ताकि हम ये समझ सकें कि दंगों से इन सब बातों से जोड़ना कितना सही है?
2011 की जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक़ उत्तर-पूर्वी दिल्ली में तकरीबन 22 लाख लोग रहते हैं. ज़ाहिर है ये 10 साल पुराना आंकड़ा है. उस लिहाज़ से इस इलाक़े की आबादी अब और भी ज़्यादा हो गई होगी. क्षेत्रफल के हिसाब से दिल्ली का ये हिस्सा 62 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है. यहां आबादी के घनत्व की बात करें तो 36155 लोग प्रति वर्ग किलोमीटर में रहते हैं. दिल्ली के औसत जनसंख्या घनत्व के मुक़ाबले ये अनुपात तीन गुना ज़्यादा है और मुंबई के मुक़ाबले ये दोगुना है.
Subscribe to:
Comments (Atom)